Remedial Vastushastra in Hindi
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वास्तु (निवास स्थान) शास्त्र (शिक्षा) एक प्राचीन वैदिक विज्ञान है जो मनुष्य और उनके निवास स्थान के बीच संबंध को दर्शाता है। वास्तु शास्त्र को व्यापक रूप से तब सबसे प्रभावी माना जाता है जब किसी घर की योजना उसके निर्माण के समय से ही बना ली जाती है, लेकिन आज के समय में हर किसी के लिए ऐसा करना संभव नहीं है और यहीं पर सुधारात्मक वास्तु शास्त्र की भूमिका सामने आती है। सुधारात्मक वास्तुशास्त्र एक ऐसी पुस्तक है जो पहले से बने घरों या स्थानों के लिए है। यह बिना किसी बड़े बदलाव या परिवर्तन के मौजूदा स्थान से निपटने के लिए सरल उपाय प्रदान करता है। यह केवल फर्नीचर और जुड़नार की व्यवस्था से संबंधित है; उदाहरण के लिए, घर की सजावट की वस्तु को उचित स्थान पर रखना या मुख्य द्वार के सामने किसी भी बाधा को हटाना। ये तकनीकें घर में रहने वाले व्यक्ति को अपने जीवन में एक सकारात्मक स्थान बनाने में मदद करती हैं। सुधारात्मक वास्तुशास्त्र पहले से मौजूद वास्तु दोषों के लिए भी प्रतिकूल समाधान प्रदान करता है। वास्तु का मानना है कि वर्तमान पारिवारिक और कार्य गतिशीलता तथा वास्तु दोषों से उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा के बीच एक मजबूत संबंध है। यह पुस्तक घर के वातावरण या कारखाने या दुकान के वातावरण में संतुलन और सामंजस्य की भावना पैदा करने के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगी। यह पुस्तक डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा 2004 में प्रकाशित की गई थी। यह पेपरबैक में उपलब्ध है। मुख्य विशेषताएं: यह हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध है। यह पुस्तक वास्तु दिशा-निर्देशों के अनुरूप है, और केवल समय-परीक्षणित समाधान प्रदान करती है। जिन लोगों को वास्तु के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है, वे भी इस पुस्तक को उपयोगी पा सकते हैं।
Dr. Bhojraj Dwivedi